मैं Shah Rukh Khan से यह अपील करता हूँ कि वे देशवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विवाद पर स्पष्टता और संवेदनशीलता के साथ माफी व्यक्त करें तथा इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की गलतफहमी, प्रचार या एजेंडे को तुरंत समाप्त करें।
नवभारत के पूर्व संपादक डॉ. राकेश पाठक ने एक टिप्पणी में कहा कि भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम द्वारा यह कहना कि IPL के लिए किसी बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदकर Shah Rukh Khan ने देश के साथ गद्दारी की है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है और इससे जनभावनाओं को अनावश्यक रूप से आहत किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि IPL भारत सरकार की स्वीकृति, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नियमों तथा भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) की निगरानी में आयोजित होता है। इसमें विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी किसी एक व्यक्ति का व्यक्तिगत निर्णय नहीं होती, बल्कि यह एक संस्थागत और वैधानिक प्रक्रिया का परिणाम होती है।
डॉ. पाठक ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक, सांस्कृतिक और खेल संबंध लंबे समय से रहे हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina भारत में अतिथि के रूप में रही हैं। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के शीर्ष स्तर पर खेल कूटनीति को प्रोत्साहन मिलता रहा है। वर्तमान में BCCI की भूमिका में जुड़े जय शाह, जो गृह मंत्री Amit Shah के पुत्र हैं, उनके कार्यकाल में भी भारत–बांग्लादेश और अन्य देशों के बीच क्रिकेट संबंध निरंतर बने हुए हैं। आज भारत के विदेश मंत्री की बांग्लादेश यात्रा भी दोनों देशों के आपसी सहयोग और विश्वास को दर्शाती है।
प्रसिद्ध मानवाधिकार रक्षक एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता
डॉ. एंथनी राजू ने इस विषय पर एक संतुलित अपील करते हुए कहा:
“आज देश का वातावरण अत्यंत संवेदनशील है और जनभावनाएँ भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं। ऐसे समय में सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्यक्तियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
मैं Shah Rukh Khan से यह अपील करता हूँ कि वे देशवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विवाद पर स्पष्टता और संवेदनशीलता के साथ माफी व्यक्त करें तथा इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की गलतफहमी, प्रचार या एजेंडे को तुरंत समाप्त करें।
यह विषय राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावनाओं, सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास का है। ऐसे मुद्दों को बढ़ाने के बजाय उन्हें शांत करना, लोकतंत्र और मानवाधिकारों की भावना के अधिक अनुरूप है।
भारत की ताकत टकराव में नहीं, बल्कि संवाद, संयम और जिम्मेदार आचरण में निहित है।”