पॉक्सो मामले में 20 वर्ष की सजा पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

पॉक्सो मामले में 20 वर्ष की सजा पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक
May 13 2026 Breaking News

पॉक्सो मामले में 20 वर्ष की सजा पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से आपराधिक अपील में बड़ी राहत

एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में माननीय Punjab and Haryana High Court ने पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत दोषसिद्ध अभियुक्त की सजा को स्थगित करते हुए अपील लंबित रहने तक जमानत प्रदान की है।

अभियुक्त को भिवानी, हरियाणा स्थित माननीय सत्र न्यायालय द्वारा 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। अभियुक्त तीन वर्ष से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रह चुका था, जिसके पश्चात माननीय हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत प्राप्त हुई।

मामले में विस्तृत अपीलीय तैयारी, ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों का गहन परीक्षण, साक्ष्यों एवं महत्वपूर्ण विरोधाभासों का सूक्ष्म विश्लेषण, तथा आपराधिक न्यायशास्त्र, संवैधानिक स्वतंत्रता एवं सजा स्थगन से संबंधित स्थापित कानूनी सिद्धांतों पर व्यापक बहस प्रस्तुत की गई।

विस्तृत सुनवाई के उपरांत तथा मामले के समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करते हुए माननीय हाई कोर्ट ने अंतिम निर्णय तक सजा स्थगित करने एवं अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया।

अपीलकर्ता / अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता

डॉ. एंथनी राजू
अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय
प्रमुख आपराधिक एवं पॉक्सो मामलों के विशेषज्ञ

अधिवक्ता प्रज्ञात भारद्वाज

यह आदेश पुनः स्पष्ट करता है कि आपराधिक अपील संवैधानिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है तथा प्रत्येक दोषसिद्धि उच्च न्यायालयों एवं संवैधानिक न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा के अधीन होती है।

मामले की प्रमुख कानूनी विशेषताएँ

हाई कोर्ट द्वारा 20 वर्ष की सजा स्थगित

आपराधिक अपील लंबित रहने तक जमानत प्रदान

ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों को प्रभावी चुनौती

साक्ष्यों एवं विरोधाभासों का विस्तृत परीक्षण

संवैधानिक एवं आपराधिक कानून पर मजबूत बहस

अपीलीय अधिकार क्षेत्र के माध्यम से व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण

“अपीलीय न्यायालय संवैधानिक संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं ताकि दोषसिद्धि कानून, साक्ष्य एवं न्यायिक प्रक्रिया के कठोर मानकों पर खरी उतर सके।”

डॉ. एंथनी राजू देशभर में जटिल आपराधिक मुकदमों, पॉक्सो मामलों, झूठे फँसाव, जमानत, सजा स्थगन, एफआईआर रद्दीकरण एवं संवैधानिक आपराधिक उपचारों से संबंधित मामलों में अपनी प्रभावशाली पैरवी के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध हैं।

कानूनी सहायता एवं परामर्श

व्हाट्सएप: +91 8588872001
ईमेल: office@humanrightscouncil.in

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अस्वीकरण

यह प्रकाशन केवल विधिक जागरूकता एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से जारी किया गया है। सजा स्थगन अथवा जमानत प्रत्येक मामले के तथ्यों, साक्ष्यों, कानूनी मुद्दों एवं न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है। यहाँ उल्लिखित किसी भी तथ्य को अंतिम निर्णय पर टिप्पणी अथवा कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाए।

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